तांत्रिक जड़ी बूटियां – mantra-for-vashikaran

Posted by on Dec 24, 2016 in Astrology indian astrology, Relationship Problems solutions, Spiritual Healing Service, vashikaran, Vashikaran Mantra | 0 comments

vanapstai-55तांत्रिक जड़ी बूटियां – mantra-for-vashikaran तंत्र में अतिप्रचलित कुछ वस्तुएं

तांत्रिक जड़ी बूटियां भाग -1
Tantrik herbs part – 1 इस जड़ी बूटी का दुरपयोग करने पर अल्पायु हो जाता है मनुष्य |इस जड़ी बूटी का रहस्य किसी को नहीं बताना चाहिए | केवल उपयुक्त साधको के लिए ही ये दिया गया है | बाकि लोग एस का प्रोयोग नहीं करे बिना जानकारी के नहीं तो आप संकट मैं आ सकते है || ये देवीय जड़ी है

सहदेवी / Sahadevi – गावों में सहदेई भी कहते हैं एश कलर्ड फ़्लिबिन भी कहते हैं

सहदेवी एक छोटा सा कोमल पौधा होता है जो एक फुट से साढ़े तीन फुट तक की ऊँचाई का होता है। पौधा भले ही कोमल हो पर तंत्र शास्त्र और आयुर्वेद में ये किसी महारथी से कम नहीं है।
अपने दिव्य गुणों के कारण आयुर्वेद के ग्रंथों में इसका उल्लेख्य कोई बड़ी बात नहीं है परन्तु इसमें कई दिव्य गुण हैं जिसके कारण इसे देवी पद मिला और इसका नाम सहदेवी पड़ा। विभिन्न तंत्र शास्त्र और यहाँ तक की अथर्ववेद में भी इसका उल्लेख मिलता है।
आशा है इससे आप इसकी महत्ता समझेंगे।

किसी रवि-पुष्य योग के दिन प्रात: सूर्योदय पूर्व शास्त्रीय विधि पूर्वक एक दिन पूर्व संध्याकाल में निमंत्रण देकर प्राप्त कर लें फिर घर लें आये और पंचामृत से स्नान कराकर उसकी विधिवत षोडशोपचार पूजा करें।

पूजन मन्त्र इस प्रकार है

“ॐ नमो भगवती सहदेवी सदबलदायिनी सर्वंजयी कुरु कुरु स्वाहा।”

तंत्र-सिद्धि में सहदेवी का पोधा विभिन कार्यो मे प्रयुक्त होता है l

यदि कोई विशेष प्रयोजन न हो तो उपरोक्त विधि से पूजित पौधे के स्वरस में शुद्ध केसर और शुद्ध गोरोचन मिलाकर गोली बना कर सुरक्षित रख लें। जब कभी आवश्यकता हो गंगाजल में घिस कर उसका तिलक करें। ये चमत्कारी प्रभाव और सर्वत्र विजय देने वाला जगत मोहन प्रयोग है।

1. शांति, धन-धान्य-व्यापार वृद्धि के लिए :-

A. विधिवत सिद्ध की हुई जड़ को लाल वस्त्र में लपेट कर तिजोरी मे रखने से अभीष्ट धन-वृद्धि होती है l

B. रसोई अनाज भंडार में शुद्ध स्थल पर स्थापित करने से अन्न परिपूर्ण रहता है।

C. घर के मंदिर में स्थापित कर नित्य प्रणाम करने से घर में शांति रहती है।

2. विवाद विजय

यदि किसी प्रकार के विवाद में फंस जाएँ और निर्णय के लिए जाना हो तो इसकी विधिवत सिद्ध की हुई जड़ को धारण करने पर निश्चित ही विजय प्राप्त होती है।

3. प्रभाव-वृद्धि:-

पंचाग का चुर्ण तिलक की भाति मस्तक और जिह्वा पर लगा कर कही जाए तो दर्शको पर विशेष प्रभाव पड़ता हैl सब लोग इसको सम्मान की दृष्टी से देखते और सुनते है l

4. मोहन प्रयोग `:-

A. इस पौधे की जड़ का अंजन लगाने से दृष्टी मे मोहक-प्रभाव उत्पन्न होता है l

B. तुलसी-बीजचूर्ण तु सहदेव्य रसेन सह। रवौ यस्तिलकं कुर्यान्मोहयेत् सकलं जगत्।।

तुलसी के बीज के चूर्ण को सहदेवी के रस में पीस कर तिलक के रूप में उसे ललाट पर लगाएं। उससे उसको देखने वाले मोहित हो जाते हैं।

C. अपामार्गों भृङ्गराजो लाजा च सहदेविका। एभिस्तु तिलकं कृत्वा त्रैलोक्यं मोहयेन्नरः।।

अपामार्ग-ओंगा, भांगरा, लाजा, धान की खोल और सहदेवी इनको पीस कर उसका तिलक करने से व्यक्ति तीनों लोकों को मोहित कर लेता है।

इन प्रयोगों की सिद्धि के लिए अग्रिम दिए हुए मंत्रों के दस हजार जप करने से लाभ होता है।

 मन्त्र – 

”ॐ नमो भगवते रुद्राय सर्वजगन्मोहनं कुरु कुरु स्वाहा।“

                                                                                                     अथवा

                         ”ॐ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यश्य यश्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा।”

5. वशीकरण प्रयोग :

A. गृहीत्वा सहदेवीं च छायाशुष्कां च कारयेत्। ताम्बूलेन च तच्चूर्ण सर्वलोकवशंकरः।।

सहदेवी को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें तथा उसे पान में डाल कर खिलाएं तो सभी का वशीकरण हो जाता है।

B. रोचना सहदेवीभ्यां तिलकं लोकवश्यकृत्।

गोरोचन और सहदेवी को मिलाकर उसका तिलक करने वाला सब को वश में कर लेता है।

वशीकरण मंत्र
”ॐ नमो नारायणाय सर्वलोकान् मम वशं कुरु कुरु स्वाहा।“

एकलक्षजपान्मन्त्रः सिद्धो भवति नान्यथा। अष्टोत्तरशतजपात् प्रयोगे सिद्धिरुत्तमा।। एक लाख जप से यह मंत्र सिद्ध होता है और प्रयोग के समय इस मंत्र का 108 बार जप करके प्रयोग करने से सफलता मिलती है।

6. शत्रु स्तम्भन प्रयोग:

A. ‘‘ऊँ नमो दिगंबराय अमुकस्य स्तंभन कुरु कुरु स्वाहा।

अयुत जपात् मंत्रः सिद्धो भवति। अष्टोत्तर शत जपात् प्रयोगः सिद्धो भवति।

उपर्युक्त मंत्र का दस हजार जप करने से मंत्र सिद्ध होता है और आवश्यकता होने पर एक सौ आठ बार जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है। मंत्र – ‘अमुकस्य’ के स्थान पर जिसके आसन पर स्तंभन करना हो उसका नाम लेना चाहिए।

B. अपामार्ग और सहदेई को लोहे के पात्र में डालकर पींसें और उसका तिलक मस्तक पर लगाएं। अब जो भी देखेगा उसका स्तंभन हो जाएगा।

C. भांगरा, चिरचिटा, सरसों, सहदेई, कंकोल, वचा और श्वेत आक इन सबको समान मात्रा में लेकर कूटें और सत्व निकाल लें। फिर किसी लोहे के पात्र में रखकर तीन दिनों तक घोटें। अब जब भी उसका तिलक कर शत्रु के सम्मुख जाएंगे, तो उसकी बुद्धि कुंठित हो जाएगी।

7. अग्नि स्तम्भन

सहदेवी, घृतकुमारी और आक के रस को मिलाकर लेपन करने से अग्नि स्तंभित होती है। उक्त मिश्रण को हाथ में लगाकर यदि अग्नि में भी हाथ डाल दें तो हाथ नहीं जलेगा। ऐसा तंत्र ग्रंथों में वर्णित है।

8. आयुर्वेद

a . इसकी जड़ को भुजा में बाँधने से विभिन्न व्याधियां और रोग स्वतः नष्ट हो जाते हैं।

b. सहदेवी पौधे की जड़ के सात टुकड़े करके कमर में बांधने से अतिसार रोग मिट जाता है।

c. सहदेवी का पौधा नींद न आने वाले मरीजों के लिए सबसे अच्छा है . इसे सुखाकर तकिये के नीचे रखने से अच्छी नींद आती है

d. इसके नन्हे पौधे गमले में लगाकर सोने के कमरे में रख दें . बहुत अच्छी नींद आएगी .

e. यह बड़ी कोमल प्रकृति का होता है . बुखार होने पर यह बच्चों को भी दिया जा सकता है . इसका 1-3 ग्राम पंचांग और 3-7 काली मिर्च मिलाकर काढ़ा बना कर सवेरे शाम लें . यह लीवर के लिए भी बहुत अच्छा है .

f. अगर रक्तदोष है , खाज खुजली है , त्वचा की सुन्दरता चाहिए तो 2 ग्राम सहदेवी का पावडर खाली पेट लें .

g. अगर आँतों में संक्रमण है , अल्सर है या फ़ूड poisoning हो गई है , तो 2 ग्राम सहदेवी और 2 ग्राम मुलेटी को मिलाकर लें

h. अगर मूत्र संबंधी कोई समस्या है तो एक ग्राम सहदेवी का काढ़ा लिया जा सकता है .

i. कंठमाला रोग में इसकी जड़ गले में बांधने से शीघ्र रोग मुक्ति होती है।

j. किसी कटे हुए स्थान पर इसका रस लगते ही खून बंद हो कर घाव अच्छा हो जाता है।

9. संतान-लाभ :-

a. यदि कोई स्त्री मासिक-धर्म से पांच दिन पूर्व तथा पांच दिन पष्चात तक गाये के घी मे सहदेवी का पंचाग सेवन करे तो अवश्य गर्भ सिथर होता है l

b. इसको दूध में पीस कर नस्य लेने से स्वस्थ संतान पैदा होती है।

10. प्रसव-वेदना निवारक :-

इसकी जड़ तेल मे घिसकर जन्नेद्रिये पर लेप कर दें l अथवा स्त्री की कमर मे बांध दें , तो वह प्रसव-पीढा से मुक्त हो जाती हैं l

11. पथरी
गुर्दे की पथरी में इसके स्वरस को 4-5 पत्ते तुलसी के रस और भूमि आंवला के रस के साथ नियमित रूप से एक सप्ताह लेने पर पथरी स्वयं टूट कर बाहर आ जाती है।

मित्रों, ये तो बस झलक मात्र है इसके अनेकों प्रयोग हैं जिन्हें एक लेख में समेट पाना सम्भव नहीं है।

सबसे जरुरी ये है की आप इसके पौधे को पहचानते हों। यदि न मालूम हो तो किसी जड़ी बूटी के जानकार व्यक्ति या माली की मदद से खोज लें।
क्यूंकि इससे मिलते जुलते दर्जनों पौधे हैं और गलत पौधे पर मेहनत करने का कोई लाभ नहीं होगा।

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Powerful Vashikaran Mantras for Lost Love

Posted by on Mar 29, 2016 in Get Love Back, love spells, Relationship Problems solutions, Vashikaran Mantra | 0 comments

Powerful Vashikaran Mantras for Lost Love

how-to-get-your-ex-girlfriend-back-after-a-break-upThere are very powerful vashikaran mantra practiced by many vashikaran expert for helping the weak and vulnerable people such powerful mantras for lost love are in use since ancient times. The mantras for getting lost love back is a direct approach that point toward the ex lover and change his mind completely and make him come for you desperately. Vashikaran mantras for lost love and vashikaran mantra for getting lost love back facilitate the lover in get back his love in just no time.

Astrology has powerful and effective branches which can bring anything back into your life. A broken relationship can be together again by this powerful tool. In today’s scenario, we often see people breaking their relationships because of ego and anger. There are various ways in astrology and mantra to get ex love back. One of the most powerful tools in astrology is Vashikaran spells. This will really help you and will bring your ex lover back.

It is indeed very difficult to feel the pain and stress of broken relationship but Pt. Harish Chandra Dwivedi Ji will try to resolve all your questions regarding this such as how to get ex lover back. This Vashikaran spell will help to possess the mind of your love and will bring happiness and stability in your relationship. But for the effective and best results, it is important to recite the mantras with correct pronunciation.

Pt. Harish Chandra Dwivedi Ji is a renowned astrologer in various methodologies but often deals with such aspects in an effective way. He will provide you the best solution to bring your ex lover back into your life and get relived from the pain of separation and distress which is caused due to the broken relationship.

Bring back my love fast is the most common question asked by most of the people to Pt. Harish Chandra Dwivedi Ji. For them he provide Vashikaran spells that has to be recited again and again with full concentration. He has vast knowledge of various tantras and mantras. He is an expertise astrologer in the field of Vashikaran and has been providing solutions to the people from past many years. He will definitely assure you to get your ex lover back into your life. His methodologies and mantras are very effective and 100% Guaranteed secured that will bring happiness in your life.

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ब्रह्मास्त्र विद्या प्रयोग | Best Astrologer in india

Posted by on Mar 29, 2016 in Astrology indian astrology, black magic spells, Divoce problem, Get Love Back, husband wife problem, Love marriage problem, Relationship Problems solutions, vashikaran, voodoo spells | 0 comments

सृष्टि के आदि काल से ही हंसना, रोना, इच्छायें और उनकी पूर्ती में आने वाली बाधायें मनुष्य के लिये चुनौती रहे हैं | कोई धन पाना चाहता है
तो कोई मान – सम्मान पाने के लिये परेशान है | किसी को प्रेम चाहिये तो कोई व्यर्थ में ही ईर्ष्या की अग्नि में झुलसा जा रहा है | कोई भोग में
अपनी तृप्ति ढूंढ़ता रहा है तो कोई मोक्ष की तलाश में रहा है
आगमोक्त विधान के अनुसार
| अलग – अलग कामनाओं की पूर्ती के लिये दस महाविद्याओं की साधना की जाती रही है.
काली, तारा, षोडषी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी,मातंगी व् कमला की उपासना भारत की पुरानी परम्परा है |
इन दस महाविद्याओं में शत्रु का स्तम्भन करने, शत्रु का नाश करने में बगलामुखी का नाम सबसे ऊपर है | इस देवी का दूसरा नाम पीताम्बरा
भी है | इसी विद्या को ब्रह्मास्त्र विद्या कहा जाता है | यही है प्राचीन भारत का वह ब्रह्मास्त्र जो पल भर में सारे विश्व को नष्ट करने में
सक्षम था | आज भी इस विद्या का प्रयोग साधक शत्रु की गति का स्तम्भन करने के लिये करते हैं | ये वही विद्या है जिसका प्रयोग मेघनाद
ने अशोक वाटिका में श्री हनुमान पर किया था ( राम चरित मानस के सुन्दर कांड में इसका उदादर है | ब्रह्म अस्त्र तेहि सांधा कवि मन कीन
विचार, जो न ब्रह्म सर मानऊ महिमा मिटै अपार ), ये वही ब्रह्मास्त्र है जिसकी साधना श्रीराम ने रावण को मारने के लिये की थी, ये वही
ब्रह्मास्त्र है जिसका प्रयोग महाभारत युद्ध के अंत में कृष्ण द्वैपायन व्यास के आश्रम में अर्जुन और अश्वत्थामा ने एक दूसरे पर किया था
और जिसके बचाव में श्री कृष्ण को बीच में आना पड़ा था | ( महाभारत के अंत में ) ये वही सुप्रसिद्ध विद्या है जिसके प्रयोग से कोई बच नहीं
सकता | आज वही ब्रह्मास्त्र विद्या – बगलामुखी साधना आपको बतायेंगे |
तंत्र शास्त्र के अनुसार कृत युग में एक भीषण तूफ़ान उठा उससे सारे संसार का विनाश होने लगा | इसे देखकर भगवान विष्णु अत्यंत चिंतित
हुये | तब उन्होंने श्री विद्या माता त्रिपुर सुंदरी को अपनी तपस्या से संतुष्ट किया | सौराष्ट्र में हरिद्रा नामक सरोवर में जल क्रीड़ा करते हुये
संतुष्ट देवी के ह्रदय से एक तेज प्रगट हुआ जो बगलामुखी के नाम से प्रख्यात हुआ | उस दिन चतुर्दशी तिथि थी और मंगलवार का दिन था |
पंच मकार से तृप्त देवी के उस तेज ने तूफ़ान को शांत कर दिया | देवी का यह स्वरुप शक्ति के रूप में शत्रु का स्तम्भन करने के मामले में
अल्टीमेट था | इसलिये इसे ही ब्रह्मास्त्र विद्या कहा जाता है |
ये देवी दक्षिण मत से भी सिद्ध हो जाती है व् कौलमत द्वारा भी जल्द प्रसन्न हो जाती है
ॐ ह्लीं बगालामुखिं सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ‘
इस बगलामुखी मन्त्र के नारद ऋषि है, बृहती छंद है, बगलामुखी देवता हैं, ह्लीं बीज है, स्वाहा शक्ति है और सभी मनोकामनाओं को पूरा
करने के लिये इस मन्त्र के जप का विधान है | इसका पुरश्चरण एक लाख जप है | चंपा के फूलों से दस हजार होम करना चाहिये, एक हजार
बार तर्पण करना चाहिये सौ बार मार्जन करना चाहिये और दस ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिये | इससे मन्त्र सिद्ध हो जाता है | जब मन्त्र
सिद्ध हो जाये तब प्रयोग करना चाहिये |
(१) पुरश्चरण शुरू करने के लिये मंगलवार को जब चतुर्दशी तिथि पड़े तो वह उपयुक्त रहती है |
(२) पुरश्चरण के दौरान नित्य बगलामुखी कवच अवश्य पढ़ना चाहिये अन्यथा खुद को ही हानि होती है |
(३) बगलामुखी के भैरव त्रयम्बक हैं | पुरश्चरण में दशांश त्रयम्बक मन्त्र अवश्य पढ़ना चाहिये | ये मनुष्य को वह शक्ति धारण करने की पात्रता प्रदान करता है |
(४) इस प्रकार छत्तीस पुरश्चरण करने वाले को साक्षात बगलामुखी सिद्ध हो जाती है | तब मनुष्य ब्रह्मास्त्र के प्रयोग के लिये योग्यता प्राप्त कर लेता है |
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शारीरिक सम्बन्ध से होती है ऊर्जा स्थानांतरित| तांत्रिक क्रियाओं का भय

Posted by on Mar 29, 2016 in Astrology indian astrology, Relationship Problems solutions | 0 comments

Black Magic Spells Maximum Using in USA and South America For Sexप्रकृति में विकास और संतति उत्पत्ति का माध्यम शारीरिक सम्बन्ध है |सभी जीवों में यह होता है ,वनस्पतियों में इसकी प्रकृति भिन्न होती है किन्तु होता वहां भी है बीजारोपण ही ,,भले परागों के ही रूप में क्यों न हो |इस प्रक्रिया में जंतुओं में उत्तेजना और आनंद की अनुभूति होती है ,जिसे पाने अथवा एकाधिकार के लिए आपसी संघर्ष भी होते हैं |मनुष्य में यह देखने में और व्यवहार में एक सामान्य प्रक्रिया है जो संतति वृद्धि का माध्यम है |परन्तु इसमें बहुत बड़े बड़े रहस्य भी हैं और बहुत बड़ी बड़ी क्रियाएं भी होती हैं ,जो सम्बंधित व्यक्तियों को जीवन भर प्रभावित करती है |
देखने-समझने में मामूली सा लगने वाला आपसी शारीरिक सम्बन्ध पूरे जीवन अपना अच्छा अथवा बुरा प्रभाव डालता ही रहता है ,भले एक बार ही किसी से शारीरिक सम्बन्ध क्यों न बने हों |यह मात्र लिंग-योनी का सम्बन्ध और आपसी घर्षण से उत्पन्न आनंद ही नहीं होता ,अपितु यह दो ऊर्जा संरचनाओं ,ऊर्जा धाराओं के बीच की आपसी प्रतिक्रया भी होती है ,दो चक्रों की उर्जाओं का आपसी सम्बन्ध भी होता है |बहुत लोग असहमत हो सकते हैं ,बहुत लोगों को मालूम नहीं हो सकता ,बहुत लोगों ने कभी सोचा ही नहीं होगा किन्तु यह अकाट्य सत्य है की यह आपसी सम्बन्ध ऊर्जा स्थानान्तरण करते हैं एक से दुसरे में ,यहाँ तक की बाद में भी इनमे ऊर्जा स्थानान्तरण होता रहता है ,बिना सम्बन्ध के भी |इसकी एक तकनिकी है ,इसका एक रहस्य है ,जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा धारा से सम्बंधित है |इसे हमारे ऋषि-मुनि जानते थे ,इसीलिए उन्होंने कईयों से शारीरिक सम्बन्ध रखने की वर्जना की ,भिन्न जातियों ,भिन्न लोगों से सम्बन्ध रखने को मना किया |

हिन्दू धर्म सहित कई धर्मो में पत्नी को अर्धांगिनी माना जाता है ,क्यों जबकि वह खून के रिश्ते में भी नहीं होती |इसलिए ,क्योकि वह आधा हिस्सा [रिनात्मक] होती है जो पति [धनात्मक] से मिलकर पूर्णता प्रदान करती है |इसका मूल कारण इनका आपसी शारीरिक सम्बन्ध ही होता है ,अन्यथा वैवाहिक व्यवस्था तो एक कृत्रिम सामाजिक व्यवस्था है सामाजिक उश्रीन्खलता रोकने का ,और यह सभी धर्मों में सामान भी नहीं है न विधियाँ ही समान है |मन्त्रों से अथवा परम्पराओं-रीती-रिवाजों से रिश्ते नहीं बनते और न ही वह अर्धांगिनी बनती है |यही वह सूत्र है जिसके बल पर उसे पति के पुण्य का आधा फल प्राप्त होता है और पति को उसके पुण्य का |वह सभी धर्म-कर्म ,पाप-पुण्य की भागीदार होती है ,इसलिए उसे अर्धांगिनी कहा जाता है |
सोचने वाली बात है कि ,जब पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध रखने मात्र से उसे आपका आधा पाप-पुण्य मिल जाता है ,तो जिस अन्य स्त्री या पुरुष से आप सम्बन्ध रखेंगे ,क्या उसे आपका पाप-पुण्य ,धर्म कर्म नहीं मिलेगा |जरुर मिलेगा इसका सूत्र और तकनिकी होता है |यह सब ऊर्जा का स्थानान्तरण है ,यह ऊर्जा का आपसी रति है ,यह उर्जाओं का आपसी सम्बन्ध है ,जो मूलाधार से सबन्धित होकर आपसी आदान-प्रदान का माध्यम बन जाता है |यह भी भ्रम नहीं होना चाहिए की एक बार का सम्बन्ध से कुछ नहीं होता |एक बार का सम्बन्ध जीवन भर ऊर्जा स्थानान्तरण करता है ,भले उसकी मात्रा कम हो ,किन्तु होगी जरुर |भले आप किसी वेश्या या पतित से सम्बन्ध बनाएं किन्तु तब भी ऊर्जा का स्थानान्तरण होगा |आपमें सकारात्मक ऊर्जा है तो वह उसकी तरफ और उसमे नकारात्मक ऊर्जा है तो आपकी तरफ आएगी भी और आपको प्रभावित भी करेगी |यह तत्काल समझ में नहीं आता ,क्योकि आपमें नकारात्मकता या सकारात्मकता अधिक हो सकती है जो क्रमशः विपरीत उर्जा आने से क्षरित होती है |अगर नकारात्मकता और सकारात्मकता का संतुलन बराबर है और आपने किसी नकारामक ऊर्जा से ग्रस्त व्यक्ति से सम्बन्ध बना लिए तो आने वाली नकारात्मकता आपमें अधिक हो जायेगी और आपका संतुलन बिगड़ जाएगा ,फलतः आप कष्ट उठाने लगेंगे ,,फिर भी चूंकि आपको इस रहस्य का पता नहीं है इसलिए आप इस कारण को न जान पायेंगे और न मानेंगे |किन्तु होता ऐसा ही है |

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